गगन नेहक बना बदरा मधुर बरखा बहाबै अछि
पिया धरतीक आँचरमे अमृत रस ई चुआबै अछि
सजल नैना अहाँकेँ ई धनुष सन देखि कजरायल
हमर ओझल हियामे ओ बिलोका बड़ खसाबै अछि
जखन बाजल झनक पायल झमाझम भय कतहुँ बरसल
हुनक केशक हवा सगरो सुगंधित मन बनाबै अछि
मिलन कय आसमे बैसल तकै छी बाट प्रियतमकेँ
उमड़ि कय मेघ जे गरजै हियामे लौ जगाबै अछि
उमँग मोनक सगर संगे अपन नेने किए गेलहुँ
हमर ई प्राण ‘मनु’ लेने गजल विरही सुनाबै अछि
(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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