Sunday, 17 January 2010

गजल

कहिओ सम कहिओ विषम
कहिओ बेसी कहिओ कम्म


होइत रहलै अकाल मृत्यु
कहिओ गोली कहिओ बम


खेलाइत रहलै देह पर
कहिओ देवी कहिओ जम


निकलैत रहल दिन-प्रतिदिन
कहिओ टका कहिओ दम्म


ठकि रहल अनचिन्हार के
कहिओ अहाँ कहिओ हम

3 comments:

  1. नीक विषय। उत्तम प्रस्तुति।

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  2. बड्ड नीक गजल, मुदा जँ तेसर शेर मे देहक बदला मे देश आ मक्ता मे रहल के बदला मे रहलै दए देबै त बेसी नीक हेतैक।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों