Friday, 13 August 2010

गजल


अहाँ निरोध करु
अहाँ विरोध करु


लोक बढ़त आँगा
अहाँ अवरोध करु


धनी बनए धनी
एहने शोध करु


जनतंत्र अपने जन्मल
खूब ओध-बाध करु


खाएब अहाँ फास्ट-फूड
बरबाद बाध करु

4 comments:

  1. कुछ कुछ समझ आयी. अच्छी लगी.

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  2. मैथिलि भाषा में सुन्दर ग़ज़ल कही है| मैथिलि भाषा को बढ़ावा देने के लिए यहाँ पर भी sign up कर मैथिलि साहित्य ग्रुप ज्वाइन कीजिये

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  3. mere blog par aane kelie sabhi ka dhanyvad. rajeev ji yah maithili language hai.shayad ise lie aapke samjh men nhi aayi hogi.

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  4. wah...aap nirantarta banae rakhen......sadhuwaad..

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों