Tuesday, 28 June 2016

गजल

देश देह दुबराएल छै
लोक मोन उधिआएल छै

पाप पुण्य एना केलकै
स्वर्ग नर्क भरमाएल छै

भोर साँझ हमरे मेहनति
घाम केकरो आएल छै

ठोर कहि रहल जे प्रीत केर
गीत ओकरे गाएल छै

गाछ गाछ जरि रहलै मुदा
डारि पात हरिआएल छै


सभ पाँतिमे 21-21-222-12 मात्राक्रम अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों