मंगलवार, 26 जुलाई 2016

गजल

कनियें उप्पर बेसी तर
हुनकर मारल सभहँक घर

असगरुआ के जीवन की
अपने कनियाँ अपने बर

रावण चाहै राम लखन
सीता चाहथि जनकक हर

भेटत सभ चकमक चकमक
जल्दी पकड़ू कत्तौ  गर

अनचिन्हारो छै बुड़िबक
नै मानैए किनको डर

सभ पाँतिमे 222-222-2 मात्राक्रम अछि
दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों