Tuesday, 9 May 2017

गजल

एखन हारल नै छी खेल जितनाइ बाकी छै
इतिहासक पन्नामे नाम लिखनाइ बाकी छै

गन्तव्यक पथ पर उठलै पहिल डेग सम्हारल
अन्तिम फल धरि रथ जिनगीक घिचनाइ बाकी छै

विद्वानक अखड़ाहामे करैत प्रतिस्पर्धा
बनि लोकप्रिय लोकक बीच टिकनाइ बाकी छै

लागल हेतै कर्मक बाट पर ठेस नै ककरा
संघर्षक यात्रामे नोर पिबनाइ बाकी छै

माए मिथिला नै रहितै तँ के जानितै सगरो
ऋण माएके सेवा करि कऽ तिरनाइ बाकी छै

सब इच्छा आकांक्षा एक दिन छोडिकेँ कुन्दन
अन्तर मोनक परमात्मासँ मिलनाइ बाकी छै

2222-2221-221-222

© कुन्दन कुमार कर्ण

www.kundanghazal.com

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों