रविवार, 28 मई 2017

गजल

बाग नै पूरा बस एक टा गुलाब चाही
हो भरल नेहक खिस्सासँ से किताब चाही

लोक जिनगी कोना एसगर बिता दए छै
एक संगीके हमरा तँ संग आब चाही

दर्दमे सेहो मातल हिया रहै निशामे
साँझ पडिते बोतलमे भरल शराब चाही

मोनमे मारै हिलकोर किछु सवाल नेहक
वास्तविक अनुभूतिसँ मोनके जवाब चाही

सोचमे ओकर कुन्दन समय जतेक बीतल
आइ छन-छनके हमरा तकर हिसाब चाही


2122-2221-212-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों