शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

गजल

नीक केहन आइ सगरो रीत भेलै

प्रेम जकरा देलियै ओ तीत भेलै

 

जेब खाली साँझ हम बाजार गेलौं

जे कियो ई बुझलकै भयभीत भेलै

 

बोल सोहेतै किए ककरो गरीबक

आब धनिकक गाइरो नवगीत भेलै

 

जन्म भरि गिरगिट जकाँ जे रंग बदलै

ओकरे सभके किए ई जीत भेलै

 

भाइ भैयारीक मुँह चाटै कुकुर ‘मनु’

लाख सोशल मीडिया पर मीत भेलै

 

(बहरे रमल, मात्रा क्रम 2122-2122-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों