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सोमवार, 16 मार्च 2026
नीक केहन आइ सगरो रीत भेलै - गजल
शनिवार, 31 जनवरी 2026
गजल
प्रेम जिनकासँ छल ओ मुँह मोरि लेलनि
नेग दर्दक द झट नाता तोरि लेलनि
ओ हमर दर्दकेँ हँसि खिल्ली उड़ाकय
छोरि आनसँ किए नाता जोरि लेलनि
प्रेम केनाइ की बुझता निर्दयी ओ
जे हृदय केकरो छनमे कोरि लेलनि
सीखता की चलब नेहक फूलपर ओ
संग चलनाइ शूलक जे छोरि लेलनि
‘मनु’ अनाड़ी कपट छलकेँ चिन्हलक नहि
मोन नहि ओ करेजोकेँ झोरि लेलनि
(बहरे असम, मात्राक्रम 2122-1222-2122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
गजल
अहाँ मुस्कैत रही हमरा देखैत रही
अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही
रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही
सगर गुणगान अहाँकेँ हम गाबैत रही
मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही
अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही
अहाँ ढारैत रही डुबि हम पीबैत रही
सुनरकी संग हिया रसमे तीतैत रही
अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही
पिया मनुहार सँ ई जीवन जीबैत रही
(मात्राक्रम 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
शनिवार, 17 जनवरी 2026
गजल
हमरा प्रेम करु सदिखन बसन्ती पिया
नहि बाबूक हम यौ आब रहलहुँ धिया
बहुते जतन सोलह वर्ष सम्हारलहुँ
सहलो जाइए नहि आब टूटे हिया
साजन लेल रखने नेह छी कोंढ़ तर
रुकि नहि करु जुलम तरसै हमर ई जिया
आँकुर मोनमे प्रेमक जखन फूटलै
दुनियामे रहल नै आब कोनो ठिया
गेलै बीत साउन टूटि दम अछि रहल
जल्दी आउ ‘मनु’ जरि गेल आशक दिया
(बहरे कबीर, मात्राक्रम 2221-2221-2212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’