शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

गजल

अपन एकटा पुरान वार्णिक गजलकेँ, कनीक पॉलिश कय क बहरे हजजमे प्रस्तुत क रहल छी।मतलाक मिसरा-ए-ऊला सभार, ओम प्रकाश जी, लाइव मोशायरा विदेह फेशबूक ग्रूपसँ (03/03/2012)

 

गजल

अहाँ कखनो तँ बाट हमर  घरक धरबै

अहाँ बिन हाथ नहि दोसर वरक धरबै

 

निहारै राति दिन हम बाट खाली छी

अहाँ कखनो कनी कोनो सड़क धरबै

 

सगर सिंगार टुकली नाककेँ नथिया

अहीँ सेनुर पियाजी सिथ परक धरबै

 

मिलनकेँ आशमे साजनसँ हम चललौं

गड़ी घोड़ा ज भेटल नहि टरक धरबै

 

हमर जीवन सगर अछि ई अहीँ वास्ते

अहाँ बिन छोरि जीवन ‘मनु’ नरक धरबै


(बहरे हजज, मात्राक्रम- 1222-1222-1222, मतलाक मिसरा-ए-ऊलामे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)

सुझाव, समीक्षा, आदेश सादर आमंत्रित अछि।

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों