छुपि-छुपि राति दिन हम बाट निहारै छी
जल्दीसँ आबू बड़ आस कराबै छी
पूरा होयत कखन ‘मनु’ मनोकामना
हमरा किए नहि करेजसँ लगाबै छी
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
छुपि-छुपि राति दिन हम बाट निहारै छी
जल्दीसँ आबू बड़ आस कराबै छी
पूरा होयत कखन ‘मनु’ मनोकामना
हमरा किए नहि करेजसँ लगाबै छी
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें