बुधवार, 19 अगस्त 2026

गजल

चान सन शीतल रूप केहन अहाँकेँ

अप्सरा स्वर्गक होइ तेहन अहाँकेँ

 

अछि हृदयमे मूरत अहाँ केर सोभित

मोहि लेलक ई रूप एहन अहाँकेँ

 

देखिते आनंदसँ हिया भेल हर्षित

मंद शीतल मुस्कान जेहन अहाँकेँ

 

अपन आँखिक काजर बना राखि लिअ ने

प्राण हम्मर  अछि आब रेहन अहाँकेँ

 

मोटरी दिअ माथक अपन आब सगरो

‘मनु’ तँ सबटा लय लेत गेहन अहाँकेँ

 

(बहरे खफीक, मात्राक्रम : 2122-2212-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


रविवार, 9 अगस्त 2026

गजल

हाथमे हाथ लेने सगरो चलब हम

आब तोहर बिना पल भरि नहि जियब हम

 

हो सुखद की कतेको अन्हार जीबन

बनि क छाहैर तोहर संगहि रहब हम

 

दीप नेहक मिझेए नहि आब कखनो

बनि क बाती सिनेहे हरदम जरब हम

 

अछि हँसी ई सरस निश्छल बड्ड मोहक

नेह भरि-भरि करेजा तोहर गहब हम

 

छोड़ि दुनिया कतौ नहि ‘मनु’ आब जायब

आँखिकेँ तोर सोझाँ  एतहि मरब हम

 

(बहरे असम, मात्राक्रम : 2122-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 6 अगस्त 2026

गजल

अहाँ सादा कागद परक पहिल कोनो आखर छी

हिया जकरा चिन्है हमर पहिल नेहक सागर छी

 

नयनमे छी सदिखन अहाँ विष्णु ब्रह्मा शिव बनि कय

सहारा जीवनकेँ हमर अहीं मोनक आदर छी

 

दुखक भारसँ जीवन हमर जखन टूटय लागैए

सिनेहक जे छाहरि दिए दुलारक आँचर छी

 

सगर दुनिया हँसि देखलक हमर खाली जेबी टा

हिया बुझलक जे देखि कय अहीं मोनक गागर छी

 

चरण छू कय भेटय जकर सगर तीर्थक फल 'मनु'केँ
अहाँ मैया ममतामयी हमर भागक आगर छी

 

(मात्राक्रम : 1222-2212-1222-222 सभ पाँतिमे)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों