Sunday, 15 September 2013

गजल

जे केयो करै छै काम
तकरे लोक लै छै नाम

जकरा संग छै ईमान
चर्चा तकर छै सबठाम

जे केलक मरम बुझि कर्म
से नै रहल छै बेकाम

कथनीमें भरोसा कोन
करणीमें रहै छै दाम

कहबी कुन्दनक छी याह
किछु छै खास, किछु छै आम

२२२१ (मफऊलात)
सब पाँतिमें दू बेर

© कुन्दन कुमार कर्ण
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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों