Wednesday, 30 December 2015

गजल

ऐ सालक हमर अंतिम गजल

जेठ माघ देखी
भोर साँझ खेपी

राज काज कम छै
साज बाज बेसी

राजनीति छै तँइ
राजनीति खेली

हाथ गोड़ बाँचल
टूटि गेल खेती

भोर बड़ भयावह
दीप आब लेसी

सभ पाँतिमे 21-21-22 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 29 December 2015

गजल

रूप मारूक तोहर देखते कनियाँ
ख़ून देहक सगर भेलै हमर पनियाँ

नै कतौ केर विश्वामित्र छी हमहूँ
प्राण लेलक हइर ई तोर चौवनियाँ

जरि क' तोहर पजारल आगिमे दुनियाँ
माय बापक नजरिमे बनल छै बनियाँ

नीक बहुते गजल कहने छलहुँ हमहूँ
आइ सभ किछु बिसरि बेचैत छी धनियाँ

झाँपि राखू अपन रूपक महलकेँ 'मनु'
भेल पागल कतेको देखि यौवनियाँ
(बहरे मुशाकिल, मात्रा क्रम; 2122-1222-1222)
जगदानन्द झा 'मनु'

Saturday, 26 December 2015

गजल

बाल गजल

बड़ सुंदर गलफुल्लू बौआ
घोड़ा गदहा उल्लू बौआ

अंगो भीजल पेन्टो भीजल
बड़ मूतै छुलछुल्लू बौआ

इम्हर कानै उम्हर बाजै
बड़ खच्चर गँड़िखुल्लू बौआ

हरियर पीयर उज्जर कारी
लाल गुलाबी बुल्लू बौआ

आमुन जामुन इमली सिमली
गाछे गाछे झुल्लू बौआ

सभ पाँतिमे आठ टा दीर्घ अछि
चारिम शेरक दोसर पाँतिमे अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 24 December 2015

गजल

काल बड़का जोधिन छै
फनफनाइत नागिन छै

भूख नै सहि सकलहुँ तँइ
लोक कहलक पापिन छै

देह नवका जोगी सन
मोन नवकी जोगिन छै

शब्द जैठाँ जनमै खूब
अर्थ तैठाँ बाँझिन छै

आब तोहूँ अनचिन्हार
भाग हमरे सौतिन छै


सभ पाँतिमे 2122-222मात्राक्रम अछि
चारिम आ पाँचम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुकेँ छूट मानल गेल अछि

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 22 December 2015

गजल

कोनो   फूल  फूलल  अहाँके   मुस्की
कोनो   तान   छेड़ल  अहाँके   मुस्की

कस्तूरी    जकाँ   छै    सुगंधित   सौँसे
चारु   कात   पसरल   अहाँके   मुस्की

मज्जर  आमके छै  कि  की  गमकै छै
एगो   गाछ   मजरल   अहाँके  मुस्की

सिंगरहार      चंपा      चमेली      गेना
एक्के   ताग   गूथल    अहाँके   मुस्की

तीरक   नोखके  अधमरल  छै   सबतर
एहन   बाण   साधल   अहाँके    मुस्की

धड़कैछै   करेजा   कते   सब   लोकक
निसदिन  देखि  निखरल अहाँके मुस्की

जिनगी भरि पियासल रहल बड नीरज
अमरित  बनिक' बरसल  अहाँके मुस्की

सब पंक्ति में मात्राक्रम 2221-2212-222
अछि

गजल

एके बेर ओ मारूक मुस्की मारि गेलै
हम नै बुझलियै आ ई करेजा हारि गेलै
चंचल मोन आसक दीप कहियो नै जरेलक
प्रेमक खड़रि माचिस ओकरा ओ बारि गेलै
बनलौं चित्र छी मदहोश बिनु पीने शराब
छातीमे हमर नैना अपन जे गाड़ि गेलै
दिन आ राति हुनके यादिमे जरि रहल छी हम
चर्चा सुनि हमर ओ देखियौ हँसि टारि गेलै
नै छै बचल कनिको प्रेम खिस्सामे हमर यौ
ओ 'ओम'क सिनेहसँ सजल पन्ना फाड़ि गेलै
2221-2221-2221-22 प्रत्येक पाँतिमे। तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम ह्रस्वकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

गजल

आँखिक मस्ती जे अपन ओ पिया देलक
बिनु पीने हमरा शराबी बना देलक
सम्हारल छल ई करेजा बहुत जतनसँ
नैनक संकेतसँ गगनमे उड़ा देलक
अनका नचबैमे छलौं मस्त एखन धरि
ता ता थैया नाच हमरा करा देलक
जे नै बुझतै बात तकरासँ आसे की
बेदर्दी दर्दे करेजक बढ़ा देलक
कोना भेंटत "ओम"केँ चैन एतय यौ
पर्दा प्रेमक आबि अपने हटा देलक
2222-2122-1222
प्रत्येक पाँतिमे एक बेर

Saturday, 19 December 2015

गजल

गेलै दरबार अनचिन्हार
भेलै उद्धार अनचिन्हार

सभ बनि गेलै सिनेमा नीक
खाली परचार अनचिन्हार

जे खा गेलै हमर सपना से
बड़का खुंखार अनचिन्हार

ठीके महमह करैए देह
छै सिंगरहार अनचिन्हार

अप्पन की आन की ऐठाम
पूरा संसार अनचिन्हार


सभ पाँतिमे मात्राक्रम 22221-2221 अछि
तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ लघु मानल गेल अछि।

Thursday, 10 December 2015

गजल

हम झुट्ठेमे अपसियाँत
तों सत्तेमे अपसियाँत

नहियें पी सकलै शराब
जे चिखनेमे अपसियाँत

सभ खा गेलै खेनहार
किछु पत्तेमे अपसियाँत

जकरा लग सालक हिसाब
से महिनेमे अपसियाँत

के छै अनचिन्हार लेल
सभ अपनेमे अपसियाँत

सभ पाँतिमे 222-22-121 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 9 December 2015

गजल

देखियौ टुक टुक ताकै छै काठक बनल लोक
मोनमे सब किछु राखै छै काठक बनल लोक
पाँजरक हड्डी झलकै छै चामक तरसँ आब
नै किछो तइयो बाजै छै काठक बनल लोक
अपन फाटल बेमायक दर्दसँ नै कराहैत
महल अनकर टा साजै छै काठक बनल लोक
आगि छातीमे ठंढ़ा पड़ि गेलै लहकि लहकि
फूसियों मुस्की मारै छै काठक बनल लोक
कर्ज नोरक नै ककरो लग बाकी रहत आब
"ओम" कखनो नै कानै छै काठक बनल लोक
2-1-2-2, 2-2-2-2, 2-2-1-2, 2-1 मात्रा क्रम प्रत्येक पाँतिमे।

Tuesday, 8 December 2015

गजल

अपने सुरमे हम तँ गाबैत रहब
जिनगी बाजा छै बजाबैत रहब
बिरड़ो कतबो ई हिलाबै हमरा
सुन्नर फोटो नित बनाबैत रहब
कहियो बूझब हमर संकेत अहाँ
भाषा संकेतक बुझाबैत रहब
नोनी लागल जइ घरक देबालमे
एहन घरकेँ हम खसाबैत रहब
"ओमक" फुलवारी गमकतै सदिखन
ऐ फुलवारीकेँ सजाबैत रहब
2222-2122-112 प्रत्येक पाँतिमे एक बेर। चारिम शेरक पहिल पाँतिमे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।

Saturday, 5 December 2015

गजल

बड़ झूकैए जागल लोक
बड़ सूतैए जागल लोक

छै खन अनुखन सदिखन दर्द
बड़ कूथैए जागल लोक

हम्मर तोहर ओक्कर नाम
बड़ बूझैए जागल लोक

अप्पन टेटर आनक घेघ
बड़ दूसैए जागल लोक

इम्हर खधिया उम्हर भूर
बड़ मूनैए जागल लोक

हीरा मोती  माणिक संग
जश लूटैए जागल लोक

सभ पाँतिमे 222-222-21 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों