Monday, 7 November 2016

गजल

छठि भक्ति गजल

अहाँ आएब यै राना दाइ फेरो
हँ, नै जाएब यै राना दाइ फेरो

बहुत सुख संग अन धन लछमी जरूरे
अहाँ लाएब यै राना दाइ फेरो

हँसी हमरो खुशी हमरो भेटि जेतै
जँ मुस्काएब यै राना दाइ फेरो

दया सदिखन बनेने रहबै तकर आस
तँ देखाएब यै राना दाइ फेरो

गजल लीखत बहुत अनचिन्हार ऐठाँ
अहाँ गाएब यै राना दाइ फेरो

सभ पाँतिमे 1222-1222-2122 मात्राक्रम अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों