रविवार, 29 जनवरी 2023

गजल

दर्द देखायब करेजाक मानब की

काल्हि सपनोमे हँसी छोरि कानब की

 

प्रेम पुरुषक छैक गोबर अहाँ कहलौं

चीर देखायब करेजा तँ गानब की

 

दोष सभमे नहि  कतउ एकमे हेते

संग हमरो ओहिमे आब सानब की

 

आइ छै अन्हार सगरो अहाँ कहलौं

आँखि मुनि संसारमे जोत आनब की

 

किछु भरोसा  प्रेममे कय अहाँ देखूँ

होइ छै की नेह ई ‘मनु’सँ जानब की


(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों