बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

गजल

मजधारमे छोड़ि असगर गेलहुँ किए

एतेक भारी परीक्षा लेलहुँ किए

 

आएब कहि घुरि अहाँ नै अयलहुँ पिया

मोनक विरहकेँ पजाइर देलहुँ किए

 

कनि-कनि बितैए अहाँ बिन सगरो उमरि

नयनासँ ओझल पिया यौ भेलहुँ किए

 

जीवन कटत आब असगर नै ई हमर

हमरासँ एना अहाँ तमसेलहुँ किए

 

ई प्राण बिनु देह लदने थकलहुँ बहुत

माहुर तँ हम ‘मनु’ बिना नै खेलहुँ किए


(बहरे सगीर, मात्राक्रम : 2212-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों