Saturday, 1 January 2011

गजल

गजल- कालीकांत झा "बूच"

भरल भवधार छै सजनी कोना पदवार हम करबै
पडल सब भार छै सजनी, कोना पतवार हम धरबै

बनलि हम रूप करे रानी, मुदापंथक भिखारिन छी
जडल घटवार छै सजनी, कोना इजहार हम करबै

सुभावक नाव पर हमरा जखन धऽकऽ चढा देतै
अडल इकरार छै सजनी, कोना इनकार हम करबै

लगै छै मारि के दोमऽ जुआनी मारि बनिवीचे
मुद्दइ सुकुमार छै, सजनी कोना तकरार हम करबै

कहाँ धरिआर हम खसल करूआरि ओ नीचाँ
गहन अनहार छै सजनी, कोना भऽठाढ हम रहबै

1 comment:

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों