रविवार, 17 नवंबर 2013

गजल

हम अहाँकेँ देखिते सुधि बिसरि गेलौं

लेसने बिन आगि सौंसे पजरि गेलौं 

 

प्राण लेलक आँखि मिलनाइ हरजाइसँ

खा कऽ मोने मोन मुँगबा पसरि गेलौं 

 

अछि जकर मुस्की इजोते सगर चकमक

मोरिते मुँह पानि बिन हम  पिछरि गेलौं 

 

स्वर्ग भेटल अहाँ बिन नरक भेलै 

छोरि सुख बैकुंठकेँ झट ससरि गेलौं

 

देख निरमल नेह हुनकर हृदय गदगद

बुझि सफल ‘मनु’ भेल सपना झहरि गेलौं

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों