प्रस्तुत अछि जियाउर रहमान जाफरीजीक ई गजल
रोटी हम पर भारी बाबा
खायब की तरकारी बाबा
बाहर बाहर हमहूँ हँसलहुँ
आँखिक आँसू जारी बाबा
अपने अपगुण नहि देखल हम
ई बड़का बीमारी बाबा
सुख के दिनमा एबे करतै
कहि देलक दुख भारी बाबा
दौड़ रहल छी मासे मास
अफसर अछि सरकारी बाबा
अनका पर विश्वास करत के
हमही छी संहारी बाबा
सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि।
डा.ज़ियाउर रहमान जाफ़री
पीएच-डी हिंदी,एम-एड
उच्च विद्यालय माफी,जिला नालंदा,बिहार,803107mob-9934847941
रोटी हम पर भारी बाबा
खायब की तरकारी बाबा
बाहर बाहर हमहूँ हँसलहुँ
आँखिक आँसू जारी बाबा
अपने अपगुण नहि देखल हम
ई बड़का बीमारी बाबा
सुख के दिनमा एबे करतै
कहि देलक दुख भारी बाबा
दौड़ रहल छी मासे मास
अफसर अछि सरकारी बाबा
अनका पर विश्वास करत के
हमही छी संहारी बाबा
सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि।
डा.ज़ियाउर रहमान जाफ़री
पीएच-डी हिंदी,एम-एड
उच्च विद्यालय माफी,जिला नालंदा,बिहार,803107mob-9934847941
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