Saturday, 29 October 2016

गजल

धूँआ धाकड़ लीन दिवाली
के मानत ई ग्रीन दिवाली

जादव कुर्मी बाभन सोइत
सभहँक भिन्ने भीन दिवाली

सभठाँ नेता एकै रंगक
भारत हो की चीन दिवाली

छन छन टूटै नहिएँ जूटै
सीसा पाथर टीन दिवाली

देशक बाहर देशक भीतर
सौंसे घिनमा घीन दिवाली

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि


हमर एही गजलक मराठी अनुवाद भेल अछि देखल जाए।अनुवाद केने छथि चंद्रकांत यादव...


धु-ध्वनीतच लिन दिवाळी
कुणी ऐकली ग्रिन दिवाळी?

मराठा, मोची, मातंग, माळी
अशी ही ऐक्यविहिन दिवाळी

जगी नेत्यांची एक कातडी
भारत असो वा चिन दिवाळी

पेटते आणि आग पसरते
पेट्रोल, केरोसिन दिवाळी

हा असो वा तो देश असो
सर्व सणांत ही दीन दिवाळी

गजल
धूँआ धाकड़ लीन दिवाली
के मानत ई ग्रीन दिवाली
जादव कुर्मी बाभन सोइत
सभहँक भिन्ने भीन दिवाली
सभठाँ नेता एकै रंगक
भारत हो की चीन दिवाली
छन छन टूटै नहिएँ जूटै
सीसा पाथर टीन दिवाली
देशक बाहर देशक भीतर
सौंसे घिनमा घीन दिवाली
सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि
9 comments
Comments
Jan Anand Mishra बड़ नीक गजल जे "जोगि.."क मजा दैत अछि
सभठाँ नेता एकै रंगक
भारत हो की चीन (दिवाली)....जोगि.. स र र र
प्रदीप पुष्प कल्पनातीत आ सब तरहें नव फिनिसिंग।
Dinesh Yadav इ सिर्जना मात्र निके नय, चहटगर आ बड़ सनगर सेऽहो अछि । अन्चिनहार जी के बधाइ आ दियाबाति,हुक्कालोलि आ सुकराति के शुभकामना सेऽहो अए।
Hemant Das Him अत्यंत प्रभावशाली अछि सौंसे ग़ज़ल. तहू मे दू टा शेर बेसी स्पष्ट लागल– 
जादव कुर्मी बाभन सोइत
सभहँक भिन्ने भीन दिवाली

सभठाँ नेता एकै रंगक
भारत हो की चीन दिवाली
Chandrakant Yadav मैथिली टू मराठी…

धुर-ध्वनीतच लिन दिवाळी

कुणी ऐकली ग्रिन दिवाळी?
मराठा, मोची, मातंग, माळी
अशी ही ऐक्यविहिन दिवाळी
जगी नेत्यांची एक कातडी 
भारत असो वा चिन दिवाळी
पेटते आणि आग पसरते
पेट्रोल, केरोसिन दिवाळी
हा असो वा तो देश असो
सर्व सणांत ही दीन दिवाळी
Ashish Anchinhar मेरे लिये यह खुशी की बात है कि आपने इसे मराठी रूप दिया। इस काम के लिये धन्यवाद शब्द बेमानी है..

राग भोपाली जी सादर आमंत्रित है
अजित वडनेरकर उत्तम ग़ज़ल और अनुवाद अत्युत्तम 😃
Raj Kumar Mishra Sunder aa sateek rachna!
Saurabh Pandey बहुत खूब भाई जी
Rajiv Ranjan Pandey अखंड दीप मालाओ का उमंगमय महोत्सव आपके जीवन मे सौभाग्य एवं समृधि को प्रकाशित करे |आत्मबलिदान का प्रतिक जलता हुआ दिपोपर्व कि हार्दिक शुभकामनाएँ
Chandrakant Yadav आशिषभाई आप की भाषा में रिदम हैं… ताल हैं… छन छन टूटै नहीऍं जुटे… देशक भितर देशक बाहर… हमारे यहा मराठी में ऐसा रिदम केवल संत ज्ञानेश्वर की रचनाओंमें पाया जाता है… अवचिता परिमळू झुळुकला आळुमाळु मी म्हणे गोपाळु आला गे माये… इस तरह! सहजता के साथ आनेवाला रिदम और रिदम के साथ आनेवाली सहजता सहज नहीं होती…आप बस आप हैं!
Ashish Anchinhar चंद्रकांतजी, मैं इस योग्य नहीं। बस लिख लेता हूँ और आप लोगों के सामने रख देता हूँ।

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