मंगलवार, 3 मार्च 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-26

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------
एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। 1222-1222-1222-1222 हरेक पाँतिमे अछि। फिल्म "धरती" केर गीत अछि। गीतकार छथि राजिन्दर कृष्ण। संगीतकार छथि शंकर-जयकिशन । गायक मुहम्मद रफी। ई फिल्म 1970 मे आए रहै जाहिमे बलराज साहनी, कामिनी कौशल, राजेन्द्र कुमार, वहीदा रहमान  आदि कलाकार छलथि।

खुदा भी आसमाँ से जब ज़मीं पर देखता होगा
मेरे महबूब को किसने बनाया सोचता होगा

मुसव्विर खुद परेशां है के ये तस्वीर किसकी है
बनोगी जिसकी तुम ऐसी हसीं तक़दीर किसकी है
कभी वो जल रहा होगा, कभी खुश हो रहा होगा

ज़माने भर की मस्ती को निगाहों में समेटा है
कली से जिस्म को कितने बहारों ने लपेटा है
नहीं तुम सा कोई पहले न कोई दूसरा होगा

फ़रिश्ते भी यहाँ रातों को आकर घूमते होंगे
जहाँ रखती हो तुम पाँव, जगह वो चूमते होंगे
किसीके दिल पे क्या गुज़री, ये वो ही जानता होगा

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों