पपनी मोरै नहि आँखि यादे अहाँक
जीवन बहुते अन्हार बादे अहाँक
दिन राति चलैत अछि हमर करेजामे
छवि एककेँ बाद एक मादे अहाँक
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
पपनी मोरै नहि आँखि यादे अहाँक
जीवन बहुते अन्हार बादे अहाँक
दिन राति चलैत अछि हमर करेजामे
छवि एककेँ बाद एक मादे अहाँक
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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