मंगलवार, 19 मई 2026

गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैए

हरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैए

 

मुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहै

हियामे रस सिनेहक ई जगाबैए

 

जखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँ

तखन ई संग राधाकेँ नचाबैए

 

सलोना श्याम हे चितचोर मोहन छी

करेजक चैन ई गोपिक चुराबैए

 

मनोहर रूप ‘मनु’ ई देख कान्हाकेँ
चरणमे शीश अप्पन आ झुकाबैए

(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों