मंगलवार, 26 मई 2026

गजल

हँसू यौ पिया मोनकेँ नहि दुखाबू

अपन एहि दासीसँ नैना लगाबू

 

अहाँ बिनु विकल भेल छी राति-दिन हम

पिया यौ हमर ई जियाकेँ जुड़ाबू

 

सजौने कते छी अहाँ प्रीत मोनक

कनी आबि नेहक तँ दरशन कराबू

 

अहाँ बिनु अपन देह बैरी बनल अछि

उठू यौ पिया आब हमरो उठाबू

 

विरहमे मरण सन भ जीबैत ‘मनु’ अछि

पियाजी मिलनके गजल नव सुनाबू

 

(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों