सोमवार, 25 मई 2026

गजल

हँसै छथि ओ हिया छनमे तोरि हम्मर

सिनेहक डोर गेली ओ छोरि हम्मर

 

भ गेने दूर आँखिसँ की नेह बिसरब

किए ओ गेलखिन मुखड़ा मोरि हम्मर

 

लगा कय आस बैसल छी मोन मारल

कनी नहि सोचलनि जियरा कोरि हम्मर

 

उमड़ि आँखिसँ बसोधारा नोर बहलै

भिजल अछि भाग कोना ई बोरि हम्मर


सिनेहसँ आब बहुते अछि डरि रहल ‘मनु’

सगर अपने हिया कयलक  चोरि हम्मर


(बहरे करीब, मात्राक्रम: 1222-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों