मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

गजल

साफ पवितर गंगा जकाँ आँखि तोहर

छापि लेलक भीतर करेजाक ओहर

 

भेल हर्षित तन-मन हमर नेह पबिते

बिहुसि जेना लोभी कतौ देखि मोहर

 

आइ गदगद अछि भेल सभ रंग मोनक

ई हृदय अछि भीतरसँ गाबैत सोहर

 

छथि पिया मनमोहक हमर चित्त छलिया

बास छनि हुनकर ई हिया मोर खोहर

 

छोड़ि दुनिया नहि ‘मनु’ कतौ आब जेतै

देखि तोहर  सुन्दर छविक दिव्य जोहर

 

(बहरे खफीक, मात्राक्रम : 2122-2212-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों