साफ पवितर गंगा जकाँ आँखि तोहर
छापि लेलक भीतर करेजाक ओहर
भेल हर्षित तन-मन हमर नेह पबिते
बिहुसि जेना लोभी कतौ देखि मोहर
आइ गदगद अछि भेल सभ रंग मोनक
ई हृदय अछि भीतरसँ गाबैत सोहर
छथि पिया मनमोहक हमर चित्त छलिया
बास छनि हुनकर ई हिया मोर खोहर
छोड़ि दुनिया नहि ‘मनु’ कतौ आब जेतै
देखि तोहर सुन्दर छविक दिव्य जोहर
(बहरे खफीक, मात्राक्रम : 2122-2212-2122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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