Saturday, 24 October 2015

गजल


दू देहक तों जान छिही
हम कत्था तों पान छिही

सोहर कोबर निरगुन रस
हम तबला तों तान छिही

सौंसे बाजै खुट्टो सभ
हम पगहा तों छान छिही

बरछी भाला बंदुक संग
हम धनुषा तों बान छिही

मसुरी राहड़ि तीसी आ
हम मड़ुआ तों धान छिही

सभ पाँतिमे सात टा दीर्घ अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि
दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों