Thursday, 21 October 2010

गजल

कोनो वस्तु जखन हेड़ा जाइत छैक वा नष्ट भए जाइत छैक तकरा बादे ओकर महत्व बुझबा मे अबैत छैक। से साँचे।आइ सँ आठ-नए बर्ख पहिने जहिआ हम अपन परिवार, समाज, घर-आगँन के क्षणिक आवेश मे बिसरि अनचिन्हार बनि गेल रही तहिआ इ नीक लगैत रहए मुदा आब जखन की हमर आँगनक जेठ भौजी एहि बर्खक कलश-स्थापन सँ किछुए समय पू्र्व भगवतीक शरण मे चल गेलीह, हमरा लगैए

जे वास्तव मे हम अनचिन्हारे रहि गेलहुँ। हम केकरो चिन्हिए की नहि चिन्हिए मुदा जे-जे हमरा चिन्हैए से हमर संग छोड़बाक मोन बना

लेने अछि तकर अनुभव आब हमरा होइए। मुदा अनुभव भेनहे की हएत।समय पर केकरो वश नहि छैक। मुदा समय के फाड़ि भौजीक जे असीरबाद हमरा लग अछि ताही बले हम एतए हुनक आखर-तर्पण करबाक लेल आएल छी। प्रस्तुत अछि शब्द-श्रद्दांजलिक किछु ठोप बुन्न--------------------------------------------------

सभ बिसरलहुँ मुदा नाम अहाँक इयाद अछि

सच मानू जिनगी हमर आबाद अछि



हमर सभ किछु बस अँहिक देल थिक

नोर बनल चरणामृत हँसी परसाद अछि



भोगि लेब सभ तरहँक सुख पाइ सँ

अँहाक आँचर बिनु सभ बरबाद अछि



भनहि सभ बनि जाएत दुश्मन हमर

अनचिन्हार लग अँहिक असीरबाद अछि





1 comment:

  1. बड्ड दिनक बाद ब्लाग पर अएलहुँ आ इ दुखद समाद। विश्वास नहि होइए जे दाइ नहि रहलीह। अंतिम प्रणाम हुनका।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों