Tuesday, 1 February 2011

गजल

बटोही केहन छैक बाट पर चलि कए देखिऔ

पिआसलक पिआस घाट पर चलि कए देखिऔ



घर मे घोंघाउज केने कोनो लाभ नहि

सस्ती मँहग हाट पर चली कए देखिऔ



कमजोर वस्तुक मर्म ओना नहि बुझाएत

दिबाड़ लागल टाट पर चलि कए देखिऔ



कोना बुझबै कुसिआर आ सिठ्ठी के संबंध

कने कोल्हुआरक राट पर चली कए देखिऔ



नहि रहत कनबो मोल अहाँक गुण केर

बिनु पैंकिग हाट पर चलि कए देखिऔ

1 comment:

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों