Friday, 11 October 2013

गजल

गजल – १२

जिनगी एक वरदान छी
दैवक देलहा दान छी

राखू सोच मोनक सही
जिनगी पैघ सम्मान छी

कर्मक बाटपर नित चलू
कर्में पूर्ण पहचान छी

बुझि संघर्ष जियबै जखन
जिनगी शान अभिमान छी

कुन्दन बुझि चलल बात ई
जिनगी दू दिनक चान छी

2221+2212
बहरे – मुक्तजिब

© कुन्दन कुमार कर्ण

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों