शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

गजल

कोना कहब हम घुरि गाम आबै लेल

गेलौं अहाँ  दिल्ली धन  कमाबै लेल

 

कहबै करेजक हम दर्द दुख ककरासँ

छी गप्प रखने बहुते सुनाबै लेल

 

ठोकर कपारक लागल जखन सबतरिसँ

नहि नोर आँखिक बचलै नुकाबै लेल

 

सदिखन अहाँ बैसल मोनमे बनि मीत

की  दूर गेलौं  हमरे कनाबै लेल

 

कोना ‘मनु’ कहतै आब अप्पन दोष

घुरि आउ फेरसँ  दुनियाँ  बसाबै लेल

 

(बहरे सलीम, मात्रा क्रम  2212-2221-2221)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों