Monday, 7 October 2013

गजल

नेताक भेषमें सभ कामचोर छैक
तामससँ लोक देशक तेँ अघोर छैक

चुल्हा गरीबके दिन राति छैक बन्द
जे छैक भ्रष्ट घर ओकर इजोर छैक

ककरा करत भरोसा आम लोक आब
निच्चा अकान उप्पर घूसखोर छैक

चाही विकास चाही नै विनाश आब
जनताक ठोरपर मचिगेल शोर छैक

आलोचना करत 'कुन्दन' कतेक आर
जे चोर ओकरे मुँह एत जोर छैक

221+212+221+2121

© कुन्दन कुमार कर्ण

© www.facebook.com/kundan.karna

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों