चलू प्रेमक नगर सजनी बसाबै छी
दुनू प्रीतक डगर मिलि कय सजाबै छी
रहे दुनियाक डर ई आब कनिको नहि
हियामे दीप नेहक ओ जगाबै छी
जखन कखनो गबै छै कोइली वनमे
मधुर बंसी अहीं संगे बजाबै छी
अलग कखनो कियो नहि कय सकत हमरा
करेजा खोलि सप्पत खा बताबै छी
मधुर गाइब गजल सुरमे हिया बोड़ल
सिनेहक छांवमे ‘मनु’केँ सुनाबै छी
(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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