मंगलवार, 2 जून 2026

गजल

साधु छै चोर मिल कहै चोर सभ

झूठकेँ सत्य एतय रटै चोर सभ

 

देखि उन्नति लगातार सगरो सभक

भीतरहि डाहमे जड़ि मरै  चोर सभ

 

लूटि कय गाम आ देश जे गेल खा

मंच पर आबि नेता बनै चोर सभ

 

राति दिन खैट शोणित गरीबक बहै

आइ चैनसँ महलमे रहै चोर सभ

 

घोर कयने कते पाप संसारमे

आब ‘मनु’ न्याय डंडसँ डरै चोर सभ

 

(बहरे मुतदारिक, मात्राक्रम : 212-212-212-212)

✍🏻 जगदानन्द झामनु

 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों