हृदय कोरि कय ओ हँसै छथि
हमर मोनमे जे बसै छथि
करेजाक बनि दर्द सदिखन
नयन नीर बनिकय खसै छथि
बहुत छल मनेबाक कोसिस
मुदा ओ कपारे रुसै छथि
बना कय अपन ओ बिसरने
अखन आब अम्बर धसै छथि
बनेबाक छल चाह जिनका
अपन बनि क ‘मनु’ ओ डसै छथि
(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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