बुधवार, 3 जून 2026

गजल

जीवनक मेटैत अन्हार बाबूजी

छथि हमर भाग्यक सगर द्वार बाबूजी

 

छोड़ि सुख काटैत ओ राति-दिन दुख छथि

प्रेम परिवारक तँ आधार बाबूजी

 

केहनो संकट  अबै ठाढ़  सोझाँ ओ

छथि घरक अनमोल रखवार बाबूजी

 

आँखिमे आशीष लेने हियामे डर

छी अहीं बच्चाक संसार बाबूजी

 

हारि कखनो जीवनक खेल ‘मनु’ गेलै

सामने मुस्कैत पतवार बाबूजी

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों