Tuesday, 4 November 2014

गजल



करेज बेचै छी राति भरि
पिआर देखै छी राति भरि

मिटा कऽ चलि गेलै रंग रूप
निशान हेरै छी राति भरि

इयाद हुनकर बस सोन सन
करोट फेरै छी राति भरि

बसात पसरल चारू दिसा
सुगंध घेरै छी राति भरि

सिनेह हुनकर भेटल जते
तते उकेरै छी राति भरि

सभ पाँतिमे 12-122-2212 मात्रक्रम अछि
दोसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु अतिरिक्त छूटक तौरपर अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों