सोमवार, 1 दिसंबर 2014

गजल

अहाँ बिनु नै सुतै नै जागैत छी हम 

कही की राति कोना काटैत छी हम

 

सिनेहक मोल नै बुझलहुँ संग रहितो

परोक्षमे कते छुपि कानैत छी हम

 

करेजा केर भीतर छबि दाबि रखने

अहीँकेँ प्राण अप्पन मानैत छी हम

 

बुझू नै हम खिलाड़ी एतेक कचिया 

अहाँ जीती सखी  तेँ हारैत छी हम

 

अहाँ जतए कतौ जगमे खुश रही ‘मनु’

इहे वरदान सदिखन माँगैत छी हम

 

(बहरे करीब, मात्राक्रम  1222-1222-2122) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों