Thursday, 11 December 2014

गजल




उज्जर धरती पीयर रौद
हरियर गाछी सुन्दर रौद

नँहिए एलै खिड़की फानि
हुनके सन छै पाथर रौद

भुतला गेलै बाँटल घरमे
लागै बड़का भुच्चर रौद

जे देबै से लैए लेत
पसरल सौंसे आँचर रौद

अजगर गहुमन धामन संग
डँसने घूमै साँखर रौद

सभ पाँतिमे 22+22+22+21 मात्राक्रम अछि।
तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ लघुमानबाक छूट लेल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

No comments:

Post a Comment

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों