Friday, 14 August 2015

गजल

आइ फेरो दोस्ती के बहन्ना ताकि लै छी
नेह छोहक हेड़ाएल पन्ना ताकि लै छी

बड़ निहारै छथि ओ राहु केतुक संग शनिकेँ
हम अझक्के अपना लेल चन्ना ताकि लै छी

देहमे तरकारी ठोरमे छै दालि भात
आँखिमे हम चटनी संग सन्ना ताकि लै छी

लोक बेगरते मरि जेतै से मंजूर मुदा हम
अपना काजक खातिर सेठ धन्ना ताकि लै छी

घुरि कऽ एबे करतै प्रेम अनचिन्हार संगे
स्वागतक खातिर अँगना दलन्ना ताकि लै छी

सभ पाँतिमे2122-2221-2221-22 मात्रा क्रम अछि।


तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुकेँ संस्कृत परंपरानुसार दीर्घ मानल गेल अछि।
चारिम शेरक दूनू पाँतिमे एक-एक ठाम दीर्घकेँ लघु मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों