सोमवार, 26 नवंबर 2012

गजल

किए तीर आँखिसँ अहाँकेँ चलैए 
हँसी ई तँ घाएल हमरा करैए 

 

मधुर बाजि पाजेब पैरक छमा-छम

हृदयमे हमर राति दिन ई बजैए

 

बसंतक हबामे हिलोरे खुजल लट

चकित लोक दाँतेसँ आँगुर कटैए

 

ससरलै जँ मिसियो अहाँ केर आँचर

अपन सुधि बिसरने  कतेको मरैए

 

अहीँकेँ तँ मुँह देखि जीवैत ‘मनु’ अछि

भ जेए मिलन मोन सदिखन रहैए

 

(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम 122-122-122-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों