Tuesday, 27 November 2012

गजल

गजल

आँखिसँ खसैत नोर रुकत की नै
नोरक सरस आबो सुखत की नै
सुखिकऽ ठोर आब गेल अछि फाटि
फाटल ठोर फेरोसँ जुटत की नै

बेकल जिनगी भरि गेल दर्दसँ
करेजक बेकलता मेटत की नै

आँखिक पलक फूलि गेल कानि कऽ
बंद भेल आँखि फेरो खुजत की नै

जीबाक चाह तँ हटि गेल मोनसँ
मरलोऽ पर दुख ई छुटत की नै

सरल वर्णिक बहर ,वर्ण 13
...............बाल मुकुंद पाठक ।।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों