Friday, 9 November 2012

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास अक्टूबर लेल )


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास अक्टूबर लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास अक्टूबर  लेल  विनीत उत्पल  जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ। 






बाल गजल


नेनामे जखन कानैत रही तों चुप हमरा कराबैत रही
हम नहि मानैत रही तँ तों प्रेमसँ हमरा खुआबैत रही

तोहर आँचर छल ई दुनिया नहि हम किछु जानैत रही
मन दब रहलापर हमरा लोरी गाबि क' सुताबैत रही

पहर धरि काज केलाके बाद तों दम साधिके सुतैत रही
हमर टुहैक कानब सँ भरि-भरि राति माय जागैत रही

लोकक उपराग सुनिके बादो नै कखनो तमसाबैत रही
अपना नहि पीबि के ओ दूध हमरा जरूर पियाबैत रही

जन्मैत संगे देखै छी मायके पहिने, ठाढ़ कियो ओतय रही
आंखिमे भरल नोरक संग उत्पलके देखि मुस्काबैत रही

 सरल वार्णिक बहर वर्ण -23 

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों