सोमवार, 4 अगस्त 2014

गजल

गजल - 10

खेती अगता  आइ   बुझलियै
करमक झटहा आइ बुझलियै

असगर जिनगी मगन रही धरि
लोकक खगता आइ बुझलियै

अनकर तीमन नीक लगै छल​
बारिक पटुआ आइ बुझलियै

बापक टाका खूब उरेलहुँ
अप्पन बटुआ आइ बुझलियै

शहरी जिनगी मिट्ठ लगै छल​
गामक कुटिया आइ बुझलियै

सभ पाँतिमे मात्राक्रम –2222 21 122

© राम कुमार मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों