शनिवार, 9 अगस्त 2014

गजल

अप्पन हियसँ आइ हटा देलक ओ
शोणित केर नोर कना देलक ओ

हमरा बिनु रहल कखनो नै कहियो
देखू आइ लगसँ भगा देलक ओ

सपना जे सजैत रहै जिनगीकेँ
सभटा पानिमे कऽ बहा देलक ओ

हम बुझलौं गुलाब जँका जकरा नित
से हमरे बताह बना देलक ओ

भेटल नै इलाज कतौ कुन्दनकेँ
एहन पैघ दर्द जगा देलक ओ

मात्राक्रम: 2221-21-12222

© कुन्दन कुमार कर्ण

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों