Monday, 4 August 2014

गजल

देह जखने पुरान बनल यौ
स्थान तखने दलान बनल यौ

आङ घटलै उमेर जँ बढलै
देश दुनियाँ विरान बनल यौ

सोह सुरता रहल कखनो नै
आब नाजुक परान बनल यौ

अस्त होइत सुरूज जकाँ बुझि
राज सेहो अकान बनल यौ

रीत छी याह जीवनकेँ सत
सोचि कुन्दन हरान बनल यौ

मात्राक्रम: 2122-121-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों