Thursday, 18 August 2011

गजल

जन्म लेलोंउ जों मिथिला मे त मैथिल छी          
कर्म केलोंउ जों मिथिला मे त मैथिल छी           

मीठ बोल जों सदिखन सबहक ठोर रहे        
पान मखान स स्वागत होए त मैथिल छी         

कपटी माय नै होए ये सदिखन याद राखु        
सीता सन जों माय भेटल त  मैथिल छी       

कवी कोकिलक गान स जों मधुर छलके      
उगना बनि भगवान् भेटल त मैथिल छी     

अपने मुंह नै करब बड़ाई जानी लिया 
मिथिला हमर गाम भेल त मैथिल छी  

4 comments:

  1. मतलामे काफिया ओंउ अछि तकरा बाद सभ काफिया गलत अछि।

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  2. सुनील जी, बिना रदीफक गजल भऽ सकैए मुदा बिना काफियाक नै।

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  3. ओना १५ वर्णक सरल वार्णिक छन्दक बहर दुरुस्त अछि।

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  4. गजलक पहिल आवश्यकता अछि बहर जे एतए अछि, दोसर आवश्यकता अछि काफिया, जे नै अछि, तकरा बाद रदीफ, जे अछि..

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों