मंगलवार, 30 जुलाई 2024

गजल

जकरा केलहुँ अपना बुझि
से सभ भागल अनका बुझि

हमरा गेने घाटा छनि
नहिए गेलहुँ दुविधा बुझि

बजने हेतै किछु ने किछु
चुप्पे रहलै खतरा बुझि

असगर रहलहुँ आँगनमे
लोको देखै मजमा बुझि

हेता ओ साँचक मुरती
जनता पहुँचल चमचा बुझि

सभ पाँतिमे 22-22-22-2 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मीर अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शुक्रवार, 5 जुलाई 2024

रुबाइ

पागल हम दुनियामे पियार तकै छी

भलमानुस सब सगर वेपार तकै छी

नै कोनो दाम मनुख मनुखताकेँ

स्वार्थी लोकसँ ‘मनु’ सरोकार तकै छी

                ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


रविवार, 28 अप्रैल 2024

गजल

वीर छी हमहीं से सुना गेलै
काज पड़िते मुदा सिता गेलै

छै चलनसारि देशमे बहुते
केलहो काज किछु गना गेलै

अंत धरि रोकलहुँ मुदा तैयो
आँखिमे नोर झिलमिला गेलै

ताकमे दुख रहै जे टुटि जेतै
धैर्यमे देखि ओ पिता गेलै

लोक उम्मेद रखने अछि फाजिल
एक हम छी जकर छिना गेलै

सभ पाँतिमे 212-212-1222 मात्राक्रम अछि। किछु पाँतिमे मान्य छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।  

मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

रुबाइ

एतेक नेहमे लीबैत किएक छी

दुनिया पुछलनि हम जीवैत किएक छी 

सभ बुझला उत्तर ‘मनु’ अहूँ इ जुनि पूछू 

दिन राति एतेक पीबैत किएक छी 

                  ✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’

 


रविवार, 31 मार्च 2024

गजल

की बनब चाहै छलौं हम कि बनि गेलौं

प्रेममे प्रियतम अहीँ  केर    सनि गेलौं

 
आश जे परिवारकेँ  आब नहि रहलै

जेब खाली देख सब हीन जनि गेलै

 

सुधि रहल नै बोझ लदने अपन हमरा

प्रेम कनिको भेटते हम तँ कनि गेलौं

          

मोनकेँ भीतर घराड़ी  बसल सदिखन

छल लिखल परदेशके  देश मनि गेलौं                  

 

नेह अप्पन आब नै नेह टा रहलै

मोनमे बसि ‘मनु’ हमर साँस गनि गेलौं

 

(बहरे कलीबमात्राक्रम - 2122-2122-1222 सभ पाँतिमे)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु

 

मंगलवार, 26 मार्च 2024

रुबाइ

घुमि कनखीसँ कनीक अहाँ ताकि देलहुँ

तन मन अपन एहिपर हम हारि देलहुँ

नहि आब बैकुंठकेँ रहि गेल इच्छा

सगरो अहाँकेँ लेल ‘मनु’ बारि देलहुँ

                   ✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शुक्रवार, 8 मार्च 2024

गजल

 

सरल शुद्ध सुंदर महादेव शंकर
निरंकार शंकर महादेव शंकर


विरूपाक्ष कैलाश वासी गिरिश्वर
कपाली भयंकर महादेव शंकर


जटाजूट गंगा तिलक संग चंदा
बड़द संग अजगर महादेव शंकर


भरल भूत आँगन मरल बाघ आसन
सकल काज दुष्कर महादेव शंकर


कहींपर सजल छथि कहींपर रचल छथि
कहींपर दिगंबर महादेव शंकर


सुनाबथि कहानी सरस बनि भवानी
सहज छथि दयाकर महादेव शंकर

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि आ ई बहरे मुतकारिब मुस्समन सालिम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2024

गजल

पोथीक तर दबि पढ़ुआ सगर मरि गेल

जे प्रेममे  डूबल जीविते तरि गेल 

 

सदिखन जतय मनमे छल डरक आतंक 

अबिते अहाँके नव फूल फल फरि गेल


धरती तपल छल जे पानि बिन तरसैत

हथियाक हँसिते बरखा निमन परि गेल

   

आनक सुखक चिंता बेस अप्पन दुखसँ

डाहसँ कतेको घर तेल बिन जरि गेल 

      

पाथरसँ मनु शाइर बनि रहल अछि आब

तोरासँ जे  मृगनयनी  नजरि लरि गेल 

(बहरे सलीममात्रा क्रम - 2212-2221-2221)

जगदानन्द झा ‘मनु

 

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

गजल

नीक केहन आइ सगरो रीत भेलै

प्रेम जकरा देलियै  तीत भेलै

 

जेब खाली साँझ हम बाजार गेलौं

जे कियो  बुझलकै भयभीत भेलै

 

बोल सोहेतै किए ककरो गरीबक

आब धनिकक गाइरो नव नी भेलै

 

जन्म भरि गिरगिट जकाँ जे रंग बदलै

ओकरे सभके किए  जीत भेलै

 

भाइ भैयारीक मुँह चाटै कुकुर ‘मनु

लाख सोशल मीडिया पर मीत भेलै

 

(बहरे रमलमात्रा क्रम 2122-2122-2122)

जगदानन्द झा ‘मनु

मंगलवार, 30 जनवरी 2024

गजल

किछु नै कहलक ओ कहियो कऽ
हमहूँ नै बुझलहुँ बुझियो कऽ

दुश्मन यदि हो अपने लोक
रहि सकबै कोना हटियो कऽ

जे जे रहलै हुनका संग
ओकर गिनती नै रहियो कऽ

लिखलहुँ हम जेहन जे पाँति
अपनो नै बुझलहुँ लिखियो कऽ

सारापर करतै जयकार
लेखककेँ नै सुख मरियो कऽ

सभ पाँतिमे 22-22-22-21 मात्राक्रम अछि। ई बहरे विदेह अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शुक्रवार, 5 जनवरी 2024

गजल

ओ छल सदति दुश्मन मुदा
पहुँचल हमर आँगन मुदा

कोबर भने हो काल्पनिक
छै सत्य ई परिछन मुदा

पसरत जहाँ हिंसा कपट
चौपट तहाँ जीवन मुदा

किछु फर्क हेतै मानि लेल
हम देखलहुँ अनमन मुदा

केने रही बस आस किछु
पाछू रहल परिजन मुदा

हो आइ या की काल्हि धरि
हेबे करत गंजन मुदा

सभ पाँतिमे 2212-2212 मात्राक्रम अछि। ई बहरे बहरे रजज मोरब्बा सालिम अछि। गजलक चरिम शेरक पहिल पाँतिमे मान्य छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 16 दिसंबर 2023

गजल

हँसि तोरब मोन नहि हम सीखने छी

नहि  करेजामे सभक घर छेकने छी

 

सोपलौं जकरा अपन तन मन जनम भरि

ओकरो हाथे जहर बड़ चीखने छी 

 

आश छल अपनो समयमे  रंग हेतै

दूर रंगक  ओहि टोलसँ एखने छी

 

कीनबाकेँ लेल शहरक वास दू धुर

चास गामक तीन बीघा बेचने छी

 

करु शिकाइत एहि दुनियाकेँ कते ‘मनु’

लैत मीतक  जान  सगरो  देखने छी

 

(बहरे रमल, मात्राक्रम 2122-2122-2122) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


रविवार, 26 नवंबर 2023

गजल

टोपीमे लगै बुढ़ा  झक्कास छै

बुढ़िया बिन अछैते मरै नै आस छै 

  

गामक आइ केहन असल रखबाड़ छै 

एको धुर बचल ओकरा नै चास छै

 

शिक्षा केर घरमे बिकाइत ज्ञान छै

आजुक नीति सगरो कते बकवास छै

 

पूजै लेल  कन्या तकै सब लोक छै

बनबे लेल कनियाँ तकै अरदास छै

 

बाबू माय एने  बजट बिगड़ैत छै

साढ़ू सारि ‘मनु’ बैंक खासम खास छै

 

(मात्राक्रम 2221-2212-2212 सभ पाँतिमे।)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों