Tuesday, 8 March 2011

गजल

मोन मे बैसल मात्र एकटा साँप

बाहर सह-सह करैत कएकटा साँप



लगबैत रहलहुँ वएट आ सूचना तंत्र

बढ़ैत रहल महँगी आपदा साँप



बिकनीक डिजाइन छैक वा सुन्दरीक अपने

छाती मे लेपटाएल तगमा साँप



बुझाएत नहि रहत पाते मे मिझराएल

एनाहित डसँत सुगबा साँप







2 comments:

  1. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों